Wednesday, 13 February 2019

क्या गुर्जरों को आरक्षण मिल गया?

            

    गुर्जर कबीलाई ने आरक्षण के लिए एक बार फिर ताल ठोक दी है। लेकिन सब से अहम और महत्वपूर्ण जिज्ञासा यही है कि क्या गुर्जरों को आरक्षण मिलेगा अगर हां तो कितना? इस आलेख में हम इसी मुद्दे की तह तक जाने का प्रयास करेंगे,साथ ही यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि राजनीतिक दांव पेंच कहां और किन के ऊपर भारी पड़ रहे हैं? 

       सबसे पहले नजर डालते हैं सचिन पायलट के बयान के विश्लेषण पर जो राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के उपमुख्यमंत्री हैं और कबीलाई गुर्जर भी। इस दृष्टि से उनका यह बयान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका के हिस्से की बात है। और केंद्र के हिस्से की बात । बहुत ही कमजोर तरीके से अपना पक्ष रखने की असफल कोशिश की है सचिन पायलट। ऐसे वक्तव्य के आधार पर यह तो किसी भी रूप में  नहीं कहा जा सकता कि कांग्रेस या सचिन पायलट या राजस्थान सरकार गुर्जर आरक्षण के पक्ष में सक्षम है। पायलट खुद विधायिका को छोड़कर न्यायपालिका की बात करते हुए नजर आ रहे हैं और बाट देख रहे हैं जिससे लगता है कि गुर्जर आरक्षण अभी भी दूर की कौड़ी है। भले ही वह विधानसभा में विधायक पेश क्यों न कर दें। 
        अब विश्लेषण करते हैं प्रदेश में विपक्ष अर्थात भाजपा के पक्ष का। अरुण चतुर्वेदी ने एक बयान में कहा कि 50% से अधिक आरक्षण राजस्थान सरकार या कोई भी सरकार नहीं दे सकती। भाजपा के चतुर्वेदी शायद भूल गए कि 10% सवर्ण आरक्षण यानी कि 50 +10 अर्थात 60%  होता है । जब 10% का स्वर्ण आरक्षण संवैधानिक है तो गुर्जरों का 5% आरक्षण असंवैधानिक कैसे हो जाता है यह तो वही बता सकते हैं! क्योंकि 10 फ़ीसदी का आरक्षण दिया ही इस शर्त पर गया इसका लाभ 49.5 फ़ीसदी के अलावा के लोगों को मिलेगा अर्थात यह आरक्षण 50% की सीमा से बाहर है फिर भी सुप्रीम कोर्ट की चुपी न केवल न्यायालय की गरिमा का खुला मज़ाक है बल्कि पक्षपाती भी है। अब देखते हैं कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अनुसार आरक्षण चुनाव ओरिएंटेड हैं और हम भी लेकर ही रहेंगे। एक बात और कही कि कितने गुर्जर सचिवालय में हैं? यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में दिया जाए। सही भी है लेकिन जब सरकारें शरणार्थी हो तो उनसे इस प्रकार की उम्मीद नहीं की जा सकती। 
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी गुर्जर आरक्षण को लेकर कोई साफ बात या नजरिया नहीं रख पा रहे हैं, स्थिति साफ है । पता सभी को है की समस्या क्या है, इसका समाधान क्या है,किस तरह से होगा? लेकिन पहल कोई नहीं करना चाहता । 10 माह पहले राज्य में भारतीय जनता पार्टी थी और केंद्र में भी लेकिन गुर्जर आरक्षण जो आज की आवश्यकता भी है कि बारे में तब भी नहीं सोचा गया और अब भी नहीं। अब कांग्रेस बहाने निकालने लगी है व वादे से मुकर रही है क्योंकि कर्ज माफी में धन की कमी को बता कर और केंद्र को बीच में लाकर वादे से मुकर गई, संविदा कार्मिकों के स्थायीकरण में भी कहीं कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन फिर भी सरकार के पास उसके लिए सोचने के लिए वक्त नहीं है और ऐसे में गुर्जर आरक्षण पर केंद्र का मामला! कमाल है,गजब है साफ है कि अजीब की नूरा कुश्ती है भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की। लेकिन गुर्जर आरक्षण पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गुर्जर 5% के आरक्षण के बिना एक से उठेंगे या नहीं यह तो वक्त बताएगा।

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