Wednesday, 12 June 2019

क्या वाकई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश ज्ञानी इंडिया में शिक्षा ला पाएगी? क्या वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 इंडिया में शिक्षा के मानक स्थापित कर पाएगी?

     इस आलेख में हम सब से सटीक और सबसे बेबाक विश्लेषण करेंगे देश के सबसे अहम और अपीहार्य मुद्दे शिक्षा नीति का । इस एपिसोड में हम शिक्षा नीति का विश्लेषण करते हुए यह जानेंगे कि यह शिक्षा नीति 2019 कितनी कारगर होगी और जो बनी है उसमें कितनी अकर्मण्यता दिखाई गई हैं ? सबसे पहले शिक्षा क्या है शिक्षा का अभिप्राय क्या है? हमारे दृष्टिकोण में शिक्षा -

             



शिक्षा का अभिप्राय नागरिकों में ऐसी समझ पैदा करने से है जिसकी बदौलत नागरिक देश और परिस्थितियों के हिसाब से सोचने और सोचकर जायज व नाजायज में भेद करने में सक्षम हो सके तथा इसी सक्षमता के वे यानी प्रत्येक नागरिक एक स्वतंत्र व आत्मनिर्भर विचारधारा बन सकें।
अब सवाल यही है कि क्या वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 यही मतलब शिक्षा का माना गया है इसे समझने के लिए हमें देखना होगा डॉ के कस्तूरीरंगन की यह स्वीकारोक्ति जो उन्होंने इस नीति के ड्राफ्ट में प्रस्तावना में स्वीकार की है उन्होंने स्वीकारा है-जब मुझे मानव संसाधन विकास के माननीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जून 2017 में 6 महीने के भीतर एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने वाली एक समिति की अध्यक्षता करने के लिए कहा गया तो मैं आसानी से तैयार हो गया, उस समय मुझे लगा था कि यह समिति टीएसआर सुब्रमण्यम समिति द्वारा पहले से ही किए गए व्यापक कार्य और बाद में एमएचआरडी द्वारा लाए गए ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2016 के कुछ इनपुट्स पर आधारित होगी।आ

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