Saturday, 2 March 2019

India-Pakistan tension Analysis:By Dr. Neeraj Meel


          
   



क्या पुलवामा हमले के बाद बने माहौल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंडिया की छवि में कोई बदलाव आया है? क्या इस तरह का माहौल स्वभाविक था या भावनात्मक? इस एपिसोड में हम इन्हीं मुद्दों की तह तक जाकर जाने का प्रयास करेंगे कि सच्चाई क्या है? आपके सामने रखने बेबाक निष्कर्ष रखने का प्रयास करेंगे।
1. अखबारों और टीवी चैनलों की भड़काऊ हेड लाइन के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?
2. क्या यह सभी हेड लाइन आपको किसी भी दृष्टि से न्यूज़ का प्रतिनिधित्व करती दिखाई दे रही थी ?
आइए चलते हैं तह तक। 15 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमला होता है? यह सब कैसे हुआ इस पर सवाल उठने और उठाने के बजाए मीडिया भड़काऊ शैली के माध्यम से लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए न केवल अपनी टीआरपी बढ़ा रही थी बल्कि लोगों का ध्यान भी भटका रही थी। हमले के 10 दिन बाद  26 फरवरी की सुबह इंडियन एयर फोर्स द्वारा बालकोट में आतंकी शिविर पर हमला किया गया। इसमे इंडिया के अनुसार 12 एयर जेट का इस्तेमाल हुआ जिसमें 1200 किलो बताए जा रहे हैं।
क्या यह सवाल नहीं है कि जीप में 300 किलो और एक प्लेन में 100 किलो कैसे? क्या ये नाइंसाफी भरा नहीं है?
27 फरवरी 2019 की सुबह पाकिस्तान ने भी दावा किया कि उसके लड़ाकू विमान भी इंडिया की सीमा में घुसे और गैर- सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करके वापस आ गए! अब वह कौन सी जगह है इंडिया में जहां non-military ठिकाने है और जहां पर पाकिस्तान ने भी बम गिराए पाकिस्तान ही जाने।  खैर यह क्लियर हो चुका है कि पाक लड़ाकू विमान भी आए थे जिनमें से एक को इंडियन एयरफोर्स ने गिरा भी दिया।

इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान इस दौरान अपने एयरक्राफ्ट की खराबी की वजह से पाक अधिकृत कश्मीर में चले जाते हैं, जहां से उसे पाकिस्तान की सेना गिरफ्तार कर लेती है। उसके बाद इंडिया सरकार दावा करती है कि वह कूटनीतिक चालू से सफल हो पाएगी और अपने कमांडर को वापस ले आएगी। अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान राजी भी हो जाता है कमांडर को रिहा करने के लिए। इसी कड़ी में शुक्रवार यानी 1 मार्च 2019 को पाकिस्तान इंडिया को उसका विंग कमांडर शांति प्रयासों के तहत देने की बात करता है। इस पूरे घटनाक्रम में देश की एक राजनीतिक पार्टी चर्चा में आ जाती है कि वह एकमात्र पार्टी है जो इस टेंशन के माहौल में भी राजनीतिक रैलियां कर रही है हालांकि अन्य पार्टियां भी इस माहौल का राजनीतिकरण करने में जुटी हुई ही दिखाई दे रही थी।
इस सब के बीच सवाल यह भी खड़ा होता है कि इमरान खान इतना ही अच्छा और शांति चाहने वाला है तो वह पाकिस्तान में बैठे मसूद अजहर को क्यों नहीं इंडिया को सौंप देता? मोदी सरकार अगर इतनी ही ताकतवर है तो जाधव को वापस क्यों नहीं लाती? भारतीय जनता पार्टी इतनी ही कुशल है तो क्यों उसके शासनकाल के दौरान कंधार हाईजैक हो जाता है, अक्षरधाम हमला मुकम्मल होता है, रघुनाथ मंदिर पर हमला होता है, कारगिल हमला होता है,संसद पर भी हमला हो जाता है ,उसीकी सरकार के रहते अमरनाथ यात्रियों पर 2002 में हुआ हमला, पठानकोट हमला, उरी हमला या अमरनाथ यात्रा पर 2017 में फिर से हमला,पुलवामा हमला यह सब एक लंबी फेहरिस्त क्यों है भाजपा के शासनकाल के दौरान आतंकी हमलों की?
इंडियन एयर फोर्स के पायलट को पाक जनता पीट रही थी लेकिन पाकिस्तान की आर्मी में उसे बचा लिया, ऐसा क्यों? पाकिस्तान ने हमारे सैनिक मारे और हम ने आतंकवादी! क्या बदला पूरा हो गया? जहां पाकिस्तान इंडिया के सभी दावे खारिज भी कर रहा है तो क्या इन पर भी गौर फरमाया जाना जरूरी नहीं है कि सच्चाई क्या है?
 क्या 44 सैनिकों की ह्रदय विदारक मौत के बाद अफसरों द्वारा अपनाई गई नीति में अपनत्व का कोई भाव है ? क्या खुली छूट के बावजूद दुश्मन देश के लड़ाकू विमान देश की सीमा में घुस आए तो इसे क्या माना जाना चाहिए?
क्या आधे अधूरे स्टंट करने वाले अफसरों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? सरकारें किसी भी हादसे के बाद दोषी अफसरों पर मुकम्मल कार्रवाई क्यों नहीं करती? अजहर मसूद के कराची में सुरक्षित होने की खबर के बावजूद हमला कश्मीर की तरफ क्यों? क्या अजहर मसूद को बचाया जा रहा है, यदि हां तो क्यों और कौन बचाना चाहता है जांच नहीं होनी चाहिए?

यह कैसा हंगामा कैसा बहाव है,
सुना है सरहदों पर तनाव है ।
दिलों में तूफान और जुबान निशब्द,
जी हां इंडिया में आम चुनाव है

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