Friday, 8 March 2019

राफेल डील का सच!

     
             


    यह वीडियो राफेल डील को लेकर उपजे विवाद के दोबारा हवा में आने पर उसकी सच्चाई को बयां कर रहा है । क्या राफेल डील के अंदर कोई घोटाला हुआ है ? क्या राफेल मुद्दे को राजनीतिकरण किया जा रहा है ? क्या राफेल फाइल की चोरी करने वाले अधिकारी या कर्मचारी का नाम उजागर किया जाएगा? यह तमाम सवाल आज देश की जनता के पटल पर हैं जिनका जवाब और वाजिब जवाब मिलना बेहद जरूरी ।आइए देखते हैं इस विश्लेषण में यह सब कुछ।
    क्या आप यकीन कर सकते हैं कि देश की सुरक्षा में सेंध लग सकती है? यकीनन ऐसा एतबार हम भी नहीं कर सकते ।क्या सरकार के मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेज चोरी हो सकते हैं ? हमें भी नहीं लगता लेकिन जब मंत्रालय से गोपनीय व महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी हो जाते हैं तो ऐसे में विश्वास किस पर किया जाए और कैसे किया जाए ?
   नमस्कार मैं डॉ. नीरज मील और इस एपिसोड में हम इसी मुद्दे की तह तक जाकर असली सच को बाहर निकालने का प्रयास करेंगे। चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। बुधवार यानी 6 मार्च 2019 को रफाल मामले में सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में गोपनीय दस्तावेज चोरी होने का खुलासा किया । यूपी में चूहों ने आर डी एक्स खाया है, बिहार में चूहों ने दारु पी ली वह भी सैकड़ों लीटर तो चूहे का ये फाइल नहीं खा सकते थे? कम से कम अगर चूहे खा जाने का बहाना बनाते तो सुरक्षा का भ्रम नहीं टूटता लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यहीं से शुरू होता है अनगिनत सवालों का न रुकने वाला सफर । अब आप ही बताइए डिजिटल इंडिया के जमाने में भी फाइल चोरी हो रही है! क्या विभाग के पास डिजिटल लॉकर वाला ऐप नहीं था? आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार जिस फाइल को सबसे सीक्रेट बता कर कोर्ट में सबके सामने लाने से मना कर रही थी वह अचानक चोरी कैसे हो गई ? क्या रक्षा मंत्रालय में चोर काम कर रहे हैं? रक्षा मंत्रालय में सुरक्षा नाम की कोई चीज है या नहीं ? क्या रक्षा मंत्रालय से फाइल चोरी होने से सेना का मनोबल बढ़ जाएगा? ऐसे ही कई सवाल है जो आपके और मेरे मन में उठ रहे हैं, जिनका जवाब मिल पाना शायद ही संभव हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि फाइल चोरी की कहानी गढ़कर मुद्दे को एक नई हवा दी जा रही है या खत्म करने की साजिश है क्योंकि इंडिया में इंडिया के रीति रिवाज भी कहानियों की बदौलत ही खत्म किए गए।
   दुनिया के देशों में इंडिया एक मात्र ऐसा देश है जहां अखबारों के आलेख चोरी किए गए दस्तावेज से छपते हैं, यह बात हम नहीं बल्कि सरकार कह रही है। क्या अटॉर्नी जनरल का कोर्ट में यह इकबाल करना कि मुझे क्या कार्रवाई की जा रही है फिलहाल पता नहीं है अपने आप में एक बड़ा सवाल नहीं है? क्या सुप्रीम कोर्ट को 8 फरवरी को चोरी हुई फाइल के लिए अपनाई गई जांच पर सवाल नहीं करना चाहिए था?  क्या चोरी हो जाने वाले गोपनीय दस्तावेज अपनी वैधता खो देते हैं ? क्या सरकार अपनी गलती मान रही है? हमें खुद सोचना होगा कि राफेल को लेकर सच्चाई क्या है क्योंकि सरकार बताएगी नहीं इसलिए जरूरत है खुद के स्टीमेट करने की।

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