Monday, 11 June 2018

हनुमान बेनीवाल : एक सवाल!

-डॉ. नीरज मील
“तिजारत की राजनीति में ऐसा अक्सर होता आया है
हसरतों की आंधी में कौन बिना उड़े रह पाया है।
कोलाहल भरे इस भंवर में कोई क्यों ‘नि:शब्द’ रहे
बंद आँखों से कब कौन किसी को तौल पाया है।।”